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दीपावली बाद प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां:उदयपुर में गहलोत-पायलट सहित 5 बड़े नेताओं के वर्चस्व से नियुक्तियां बनेंगी सिरदर्द, सीपी जोशी, रघुवीर-गिरिजा को भी संतुष्ट करना चुनौती

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दीपावली के बाद राजनीतिक नियुक्तियां होने की बात कहकर एक बार फिर इसे हवा दे दी है। डोटासरा ने मंगलवार को उदयपुर में कहा कि दीपावली के बाद कार्यकर्ताओं को तोहफे मिलेंगे और उन्हें राजनीतिक नियुक्तियां दी जाएंगी। राजस्थान में 2 नवम्बर को उपचुनावों की मतगणना है, इसके दो दिन बाद ही दीपावली है। दिसम्बर में सरकार को 3 साल भी हो रहे हैं। ऐसे में अब यह तय माना जा रहा है कि दीपावली के बाद नवम्बर के महीने में राजनीतिक नियुक्तियां हो जाएंगी।

हालांकि इसके बावजूद कांग्रेस आलाकमान का राजनीतिक नियुक्तियां करना इतना आसान नहीं होगा। प्रदेशस्तर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों को संतुष्ट करना जहां टेड़ी खीर होगी। वहीं मेवाड़ में तो कांग्रेस के लिए यह सबसे ज्यादा मुश्किल होने वाला है। मेवाड़ और खासतौर पर उदयपुर में 5 नेताओं के बीच से आलाकमान को यह तय करना होगा। अकेले उदयपुर में कांग्रेस के 5 बड़े नेताओं के वर्चस्व से यहां नियुक्ति कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होगी।

सीपी जोशी, गिरिजा व्यास और रघुवीर मीणा को भी संतुष्ट करना होगा

उदयपुर में नियुक्तियों में पहले से ही अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पदों का बंटवारा मुश्किल खड़ा करेगा। उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य रघुवीर मीणा और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास को भी उदयपुर में आलाकमान को संतुष्ट रखना होगा। इन सभी नेताओं के कद बड़े हैं और इनकी कांग्रेस हाईकमान तक सीधी पहुंच है। हालांकि अशोक गहलोत और सचिन पायलट को लेकर इनका राजनीतिक मत पहले से विभाजित है।

शहर में सीपी-गिरिजा, ग्रामीण में रघुवीर मीणा का इंटरस्ट

उदयपुर में शहर जिलाध्यक्ष के दावेदारों में पंकज शर्मा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सबसे विश्वासपात्र हैं। वहीं वीरेंद्र वैष्णव और दिनेश श्रीमाली सीपी जोशी के खेमे से आते हैं। इधर गिरिजा व्यास के भाई गोपाल शर्मा की भी दावेदारी है। वहीं सचिन पायलट के समर्थक रहे लालसिंह झाला भी यहां से दावेदार हैं। इसी तरह यूआईटी चेयरमैन के पद पर भी इन्हीं नेताओं की दावेदारी है। यहां से रघुवीर मीणा गुट की नीलिमा सुखाड़िया भी दावेदार हैं।

इसी तरह बात उदयपुर ग्रामीण जिलाध्यक्ष की हो तो यहां रघुवीर मीणा लक्ष्मीनारायण पंड्या को दावेदार बनाना चाहते हैं। मगर उनका विरोधी पूर्व मंत्री खेमराज कटारा की पत्नी सज्जन कटारा और विवेक कटारा का गुट खुद का भाग्य आजमाना चाहता है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी गिरिजा और रघुवीर गुट आमने सामने है। यहां गिरिजा गुट से उनकी पुत्रवधु हितांशी शर्मा दावेदार हैं तो वहीं रघुवीर गुट से लोकेश गौड़ की दावेदारी है।

नियुक्तियों के बाद झेलनी पड़ सकती है नाराजगी-बगावत

कई बड़े नेताओं की मौजूदगी से उदयपुर में नियुक्तियों के बाद कांग्रेस को बगावत, गुटबाजी और नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। अलग-अलग लोगों की दावेदारी के चलते यहां सभी गुटों को संतुष्ट कर पाना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकता है। हालांकि हर गुट के एक-एक व्यक्ति को एक-एक पद देने का फॉर्मूला निकालकर हाईकमान इस समस्या का समाधान निकाल सकता है।

 

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