कुंभलगढ़ की पहाड़ियों पर बना ट्रैकिंग का नया डेस्टिनेशन:1200 मीटर ऊंची पहाड़ी पर 12KM बनाया लम्बा ट्रैक, कैंपेनिंग के साथ रॉक क्लाइम्बिंग
कुंभलगढ़ के जडफा गांव की पासुंद पहाड़ी को ट्रैकिंग का नया डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर दिया है। यह ट्रैकिंग का नया डेस्टिनेशन दो युवाओं ने अपनी जिद से मेवाड़ में हिमाचल और उतराखंड की तर्ज पर तैयार किया है। ट्रैकिंग के इस नए डेस्टिनेशन से कुंभलगढ़ आने वाले पर्यटक भी अटरेक्ट हो रहे है। 1200 मीटर ऊंची पहाड़ी पर 12 Km लम्बा ट्रैक बनाया गया है। कुंभलगढ़ भ्रमण करने आने वाले पर्यटक इसका मजा उठा रहे है। यहां पर कैंपेनिंग के साथ ट्रैकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, रेपलिंग जैसी गतिविधियां टूरिस्ट को करवाई जा रही है। उदयपुर से कुंभलगढ़ आते वक्त लखमावतों का गुडा के पास पहाड़ी पर है, जो की कुंभलगढ़ दुर्ग से 30 Km पहले है। नाथद्वारा से 40 Km दूर है।
पांच साल तक कुंभलगढ़ की पहाड़ियों में रिसर्च कर भीलवाड़ा के दो दोस्त ने यहां के जडफा गांव की पासुंद पहाडी को नया डेस्टीनेश का रूप दिया है। टूरिस्ट में सबसे ज्यादा लोकल फोर वोकल का स्पॉट भी इन्हें मिल रहा है। भीलवाड़ा के निखिल पंचोली और रमेश प्रजापत दोनों दोस्त है, जो कि लम्बे समय से माउंटेनर के रूप में देश के कौने-कौने में ट्रैकिंग के साथ कैंपेनिंग कर चूके है। इनका सपना था कि हम मेवाड़ में इस तरह की जगह को डेवलप किया जाए, जिससे मेवाड़ में आने वाले पर्यटकों को लुभा सके। हिमाचल और उतराखंड की पहाड़ियों की तर्च पर अब यह पॉइंट तैयार हुआ है। प्रोफेशनल तरीके से दक्ष होकर इन्होंने यहां एक्टीवीटी शुरू करवाई है। यहां पर अब तक 500 से ज्यादा पर्यटक ट्रैकिंग और कैंपेनिंग कर चूके है। हिमाचल और उतराखंड की की पहाड़ियों में पर्यटक ट्रैकिंग और कैंपेनिंग के लिए जाते है तो क्यों न ऐसे ट्रैक राजस्थान में बना दिया जाए। इस जिद को पूरा करने के लिए 10 लाख खर्च कर ट्रैक तैयार किया गया। ट्रैकिंग को तैयार करने के लिए आए खर्च की राशि को दोस्तों से उधार लिया, वहीं कुछ रकम बच्चों को कोचिंग कर इकट्ठी की गई।
शिवा वेली ट्रैक के नाम से मशहूर हो रही इस पहाड़ी पर आने वाले कई युवा अपने दोस्तों के साथ समय बिता रहे है। पहाड़ियों के बीच ग्रुप म्यूजिक परफॉर्म कर टाइम भी स्पेंड कर रहे है। कई ग्रुप ऐसे भी आ रहे है जो इस शांत वातावरण में मेडिटेशन के लिए योगा ध्यान भी करते है।
निखिल और रमेश ने बताया कि कई ग्रुप इन वादियों के बीच पारंपरिक रूप से खाना बनाकर खाना पसंद कर रहे है। जितने भी टूरिस्ट आ रहे है, उन्हें नो प्लास्टिक जोन का संदेश भी दिया जा रहा है। इनके आने से पहले ही प्लास्टिक की जगह कपड़े के बैग दे दिए जाते है। जिसमें वे एक्टिविटी में भाग लेकर वापस लौटते वक्त इकट्ठा कर अगर गलती से भी प्लास्टिक रह गया तो साथ ले जा रहे है।
कुंभलगढ़ की पहाड़ियों पर बादल टकराते है। यह नजारा पर्यटकों को काफी पसंद आता है। राजस्थान के राजसमंद जिले में बने कुंभलगढ़ दुर्ग को देखने के लिए बड़ी तादाद में पर्यटक आते है। कुंभलगढ़ में किले के चारों तरफ बनी दीवार दुनिया की दूसरे नंबर की और देश की सबसे लंबी दीवार है। कुंभलगढ़ किले में बादल महल भी बना हुआ है।











