160 किलो डोडा एक कार में मिला:अवैध डोडा चुरा से भरी कार के टायर पर पुलिस ने किया फायर, माल छोड़कर तस्कर हुए फरार
उदयपुर जिले की गोगुंदा थाना पुलिस ने रविवार रात को कार्रवाई करते हुए 160 किलो अवैध डोडा चुरा रखी एक कार को पकड़ा। पुलिस ने अवैध डोडा चुरा की पकड़ के लिए जसवंतगढ़, झाडोली कट एनएच 27 पर नाकाबंदी कर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान तस्कर गाड़ी को छोड़कर फरार हो गए।
थानाधिकारी कमलेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि नाकाबंदी के दौरान गोगुन्दा की तरफ से एक सफेद कलर की स्वीफ्ट डिजायर कार तेज गति से आती दिखाई दी। चेक करने के लिए ड्राइवर को रूकने का इशारा किया। कार सवार तस्कर तेज गति से भगाकर नाकाबंदी तोड़ भागा।
करीब 200 मीटर लगातार पीछा करते हुए थानाधिकारी सोलंकी ने पिस्टल से कार के चालक साइड के अगले टायर पर फायर किया, जिससे टायर ब्रस्ट हो गया। इसके बावजूद भी तस्कर कार को तेजगति से भगाते रहे। झाड़ोली कट के करीबन ईंटो का खेत तिराहे पर कार को सड़क किनारे छोड़ अंधेरे में पास स्थित झाड़ियों से होते हुए जंगलों की तरफ फरार हो गया। मौके पर पुलिस ने स्वीफट कार की तलाशी ली। जहां बोरों में अवैध रूप से 160 किलो डोडा चुरा भरा मिला। पुलिस ने मौके से स्वीफ्ट कार व अवैध डोडा चुरा को जब्त कर लिया है। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद थानाधिकारी बेकरिया शंकर लाल राव को सौंपी गई है।
तस्करी में अधिकतर प्रयुक्त होती है चोरी की गाड़ियां
पुलिस ने बताया कि अवैध डोडा चुरा में अमूमन चोरी की स्कॉर्पियो,फॉर्च्यूनर,क्रेटा जैसी बड़ी सीडान गाड़ियां तस्करों द्वारा काम में ली जाती है ताकि तेज रफ्तार से चलाकर रात का समय कवर किया जा सके। इस कार्रवाई में जब्त कार के चेचिस नम्बर,इंजन नम्बर और गाड़ी नम्बर में फेरबदल है, ऐसे में प्रथम दृष्टया कार के चोरी होने की आशंका है।
मारवाड़ में अधिकतर शादी समारोह में काम आता डोडा चुरा
बता दें कि अवैध डोडा चुरा के तस्कर चित्तौड़, भींडर, नीमच, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा से करीबन 1500 से 2000रुपये किलो के हिसाब से खरीदकर मारवाड़ क्षेत्र में छूटकर विभिन्न स्थानों पर 3000 से 4000 रुपए किलो के भाव से लोगों को बेचा जाता है। तस्कर दिन में खाली गाड़ियों मारवाड़ क्षेत्र से मेवाड़ के चित्तौड़, प्रतापगढ़,उदयपुर, भीलवाड़ा जिलों से एजेंटों से सम्पर्क कर गाड़ियों में माल भरवाकर रात को परिवहन कर उदयपुर, चित्तौड़, भीलवाड़ा के कई पुलिस थानों से बचकर अन्य गांवों और हाइवे के रास्तों से भी मारवाड़ ले जाते हैं।











